कोटा। कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक अभियान ‘संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के तहत शुक्रवार को गुमानपुरा स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में शहर कांग्रेस की आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। नौबत इतनी बिगड़ी कि धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। बैठक को संभालने के लिए जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, खेल-कूद प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अमिन पठान और देहात जिलाध्यक्ष भानु प्रताप को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
कांग्रेस कार्यालय में देहात और शहर की संयुक्त बैठक रखी गई थी। बैठक की शुरुआत जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने की। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के नेताओं के नाम गिनाए, लेकिन पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल का नाम जानबूझकर छोड़ दिया। इस पर गुंजल गुट के कार्यकर्ता भडक़ उठे और नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर शांति धारीवाल गुट के कार्यकर्ता भी मैदान में कूद पड़े। दोनों गुट आमने-सामने हो गए। कुछ देर तक तीखी नारेबाजी और हंगामा चला। स्थिति को देखते हुए जिलाध्यक्ष राखी गौतम समेत अन्य महिला कार्यकर्ता कार्यालय के अंदर चली गईं।
मैं तो पहले ही माला पहन चुका
बैठक में जब अतिथियों को माला पहनाने के लिए प्रहलाद गुंजल को मंच पर बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि मैं तो पहले ही माला पहन चुका हूं। इस बयान पर फिर से नारेबाजी शुरू हो गई। कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की व हाथापाई तक की स्थिति बन गई। बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने किसी तरह मामला शांत करवाया।
गुटबाजी से पार्टी कमजोर
पहली बार कोटा पहुंचे जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने गुटबाजी को खुलकर स्वीकार करते हुए कहा कि गुटबाजी किस जगह नहीं है? इसी वजह से पूरे देश में पार्टी कमजोर है। अब हम संगठन स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैठक का मकसद संगठन को मजबूत करना था, लेकिन कार्यकर्ताओं के जोश में कुछ अनियंत्रित घटनाएं हो गईं।
कार्यकर्ताओं को गलतफहमी हो गई
हंगामे को लेकर प्रहलाद गुंजल ने बताया कि कुछ कार्यकर्ताओं को गलतफहमी हो गई, कोई खास बात नहीं हुई। हमने उन्हें समझा दिया। प्रदेश स्तर पर चल रहे अभियान को लेकर बैठक थी, जो सफल रही। गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है।
पूरा संगठन एकजुट होकर काम करेगा
जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने बैठक के उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि हमने पदाधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि पूरा संगठन एकजुट होकर काम करेगा। सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता सडक़ पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने हंगामे को ‘कुछ कार्यकर्ताओं का जोश’ बताते हुए टालने की कोशिश की और कहा कि सभी वरिष्ठ नेता एक समान हैं। देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि मोदी सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने का हर सम्भव प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस जन इनके मंसूबे को कामयाब नहीं होने देंगे।
संगठन बढ़ाओ से पहले संगठन बचाओ की जरूरत
हालांकि कार्यकर्ता स्तर पर माहौल अलग था। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक तरफ संगठन बढ़ाने की बात हो रही है, दूसरी तरफ शहर में ही नेताओं के गुट संगठन को कमजोर कर रहे हैं। संगठन बढ़ाओ से पहले संगठन बचाओ की जरूरत है। बैठक में नारेबाजी के दौरान अलग-अलग गुटों ने अपने-अपने वरिष्ठ नेताओं के समर्थन में नारे लगाए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
पार्टी के लिए चिंता का विषय
यह घटना कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करती है, जो राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में पार्टी की कमजोरी का बड़ा कारण मानी जा रही है। जिला प्रभारी भारद्वाज के बयान से साफ है कि उच्च कमान भी इस समस्या से वाकिफ है और अब संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन कोटा जैसे शहर में ही अभियान की शुरुआती बैठक में इतना हंगामा होना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है।







