कोटा। कोटा नमकीन व्यापार समिति (KNVS), कोटा के तत्वावधान में होटल 5 फ्लेवर, डीसीएम रोड पर आयोजित वार्षिक मिलन समारोह में कोटा–हाड़ौती–राजस्थान के नमकीन उद्योग को एक साझा, संगठित और सशक्त मंच मिला। समारोह में हाड़ौती अंचल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से नमकीन निर्माता, व्यापारी, सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, बैंक, औद्योगिक संस्थान और स्पॉन्सर कंपनियां बड़ी संख्या में शामिल हुईं।
समिति अध्यक्ष जगदीश गांधी एवं महामंत्री प्रमोद पुरस्वानी ने बताया कि कार्यक्रम में केंद्र व राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं—प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी स्कीम, फूड सेफ्टी लाइसेंसिंग, पैकेजिंग-ब्रांडिंग, तकनीकी उन्नयन और बाजार विस्तार—की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन योजनाओं के माध्यम से लागत घटाने, गुणवत्ता सुधारने और निर्यात संभावनाएं विकसित करने पर जोर दिया।
कोटा में 20 टन प्रतिदिन नमकीन खपत
स्वागत भाषण में अध्यक्ष जगदीश गांधी ने कहा कि यह आयोजन उनके उस विज़न का परिणाम है, जिसमें कोटा–हाड़ौती–राजस्थान के नमकीन उद्यमी एक मंच पर आकर सीखें, सरकारी योजनाओं का लाभ लें और संगठित रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि कोटा शहर में प्रतिदिन लगभग 20 टन नमकीन की खपत होती है। ऐसे में फूड लैब को सुदृढ़ रूप से संचालित करने और नमकीन क्लस्टर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
क्लस्टर डेवलपमेंट व GI टैग से मिलेगी पहचान
जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि हरिमोहन शर्मा ने क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम तथा विश्वकर्मा उद्यमी योजना के अंतर्गत उपलब्ध सब्सिडी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कोटा फूड क्लस्टर में कोटा नमकीन जैसे पारंपरिक उत्पादों को शामिल किया जाएगा, जिससे उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलेगी।
शर्मा ने SPV (स्पेशल पर्पज व्हीकल) और GI टैग की महत्ता बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से उत्पादों की विशिष्ट पहचान बनती है और व्यापार को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाभ मिलता है।
कोटा कचोरी को भी मिले GI टैग की मांग
उद्योग प्रतिनिधि गोविंद मित्तल ने कहा कि कोटा कचोरी पहले से ही देशभर में “कोटा” नाम से प्रसिद्ध है। जिस प्रकार कोटा साड़ी को GI टैग मिल चुका है, उसी तरह यदि कोटा कचोरी को भी GI टैग प्राप्त होता है तो व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, नई इकाइयों की स्थापना होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
नवाचार व संगठित विपणन पर जोर
कोटा व्यापार संघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महामंत्री अशोक माहेश्वरी ने कहा कि किसी भी व्यापार की प्रगति के लिए नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण और संगठित मार्केटिंग आवश्यक है। पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और क्लस्टर मॉडल से जोड़कर वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।
योजनाओं की जानकारी
सिडबी बैंक के वैभव कुमार और PMFME/DRP की अधिकारी सुश्री स्मिता औदिच्या ने बताया कि नमकीन उत्पादन इकाइयों को परियोजना लागत का 35% तक ऋण-लिंक्ड सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये) मिलती है। SHG सदस्यों को प्रति सदस्य 40,000 रुपये तक बीज पूंजी सहायता उपलब्ध है। इसके अलावा ब्रांडिंग, मार्केटिंग, प्रशिक्षण और सामान्य बुनियादी ढांचे (जैसे कोल्ड स्टोरेज) पर 50% तक अनुदान दिया जाता है।
इनका रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति अध्यक्ष जगदीश गांधी, महामंत्री प्रमोद पुरस्वानी, कोषाध्यक्ष सुनील मित्तल, संस्थापक रामनाथ अग्रवाल, संरक्षक राजेन्द्र राजानी, उपाध्यक्ष शरद गुप्ता एवं महेश अरोड़ा, सह-मंत्री महेन्द्र गोयल, संगठन मंत्री सुनील मतानी तथा सांस्कृतिक मंत्री महेन्द्र जैन का विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्य प्रशान्त अरोड़ा, गजेन्द्र चन्देल, जगदीश नागर, गुरुसुख दास, जयेश ठदानी सहित कोटा जिला कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ये रहे उपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान नमकीन व्यापार महासंघ के प्रतिनिधि, एसएसआई कोटा के संस्थापक गोविंद राम मित्तल, जिला उद्योग केंद्र से हरि मोहन शर्मा, उद्योगपति बजरंग साबू, कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, महामंत्री अशोक माहेश्वरी, सिडबी बैंक के वैभव कुमार तथा PMFME/DRP की अधिकारी सुश्री स्मिता औदिच्या उपस्थित रहीं।









