जयपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने जयपुर स्थित NEERJA MODI स्कूल की सीनियर सेकेंडरी स्तर (कक्षा 12वीं तक) की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। यह कार्रवाई स्कूल की कक्षा 4 में पढ़ने वाली 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की आत्महत्या के मामले में की गई है। CBSE ने स्पष्ट किया है कि स्कूल में छात्र सुरक्षा और बाल संरक्षण मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
CBSE की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि अमायरा पिछले डेढ़ साल से लगातार बुलिंग का शिकार हो रही थी। इस दौरान उसके माता-पिता ने तीन से अधिक बार शिक्षकों और स्कूल कोऑर्डिनेटरों से शिकायत की, लेकिन एंटी-बुलिंग कमेटी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, घटना वाले दिन अमायरा ने आखिरी 45 मिनट में पांच बार अपनी क्लास टीचर से मदद मांगी, लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई।
10वीं-12वीं के छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा, नए एडमिशन पर रोक
CBSE के आदेश के तहत अब स्कूल नए एडमिशन नहीं ले सकेगा और निचली कक्षाओं के छात्रों को 9वीं व 11वीं में प्रमोट करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, सत्र 2025-26 में 10वीं और 12वीं के छात्र उसी स्कूल से बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे। वर्तमान में 9वीं और 11वीं में पढ़ रहे छात्रों को सत्र 2026-27 में नजदीकी अन्य स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा।
CBSE ने यह भी कहा कि स्कूल सत्र 2027-28 से सेकेंडरी स्तर (9वीं-10वीं) की मान्यता के लिए दोबारा आवेदन कर सकता है, बशर्ते सभी सुरक्षा और बाल संरक्षण प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाए। इसके बाद कम से कम दो शैक्षणिक वर्षों के अंतराल के बाद ही सीनियर सेकेंडरी स्तर की मान्यता के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
फोरेंसिक जांच प्रभावित होने के आरोप
जांच रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया कि घटना के बाद स्कूल परिसर से खून के धब्बे साफ कर दिए गए थे, जिससे फोरेंसिक जांच प्रभावित हुई। CBSE ने इसे अत्यंत गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि इससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
जांच में सामने आईं कई खामियां
जांच समिति को स्कूल में सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी कई बड़ी कमियां मिलीं। स्कूल में पर्याप्त CCTV कैमरे नहीं थे, ऊंची मंजिलों पर सेफ्टी नेट या मजबूत रेलिंग का अभाव था और काउंसलिंग सिस्टम भी प्रभावी नहीं पाया गया। एंटी-बुलिंग, POCSO और चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटियां केवल कागजों तक सीमित थीं। इसके अलावा, छात्रों और स्टाफ द्वारा ID कार्ड न पहनना और हर फ्लोर पर पर्याप्त स्टाफ की तैनाती न होना भी गंभीर चूक मानी गई।
20 नवंबर को जारी हुआ था नोटिस
CBSE ने इस मामले में 20 नवंबर 2025 को स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन स्कूल का जवाब बोर्ड को संतोषजनक नहीं लगा। जांच के बाद CBSE इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि यदि स्कूल ने तय सुरक्षा, निगरानी और काउंसलिंग प्रोटोकॉल का पालन किया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। बोर्ड ने स्कूल पर एफिलिएशन बायलॉज के क्लॉज 2.4, 4.7.6 और 4.7.10 के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है।








