नेत्र जांच शिविर में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा, कमजोर नजर बन रही सड़क हादसों की बड़ी वजह
कोटा।
सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चल रहे सड़क सुरक्षा अभियान के तहत कोटा में एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। वाहन चालकों की आंखों की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि करीब 70 फीसदी वाहन चालक किसी न किसी आंखों की समस्या से पीड़ित हैं, इसके बावजूद वे नियमित रूप से वाहन चला रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर दृष्टि सड़क हादसों की बड़ी वजह बनती जा रही है।
बस स्टैंड पर लगा नेत्र जांच शिविर
सड़क सुरक्षा अभियान के अंतर्गत तालाब की पाल स्थित बस स्टैंड पर विशेष नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का आयोजन परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस, कोटा सड़क सुरक्षा समिति, लायंस क्लब कोटा टेक्नो और मिश्रा ऑप्टीकल के संयुक्त सहयोग से किया गया। शिविर में 102 वाहन चालकों, सहायक चालकों, यात्रियों और आम लोगों की आंखों की जांच की गई।
70 फीसदी लोगों में पाई गई आंखों की समस्या
कोटा सड़क सुरक्षा समिति के उप सचिव भुवनेश गुप्ता ने बताया कि जांच में सामने आया कि करीब 70 प्रतिशत लोगों की नजर कमजोर है। इसके अलावा कई लोगों में आंखों में जलन, धुंधला दिखना, सिरदर्द, दूर की वस्तुएं साफ न दिखने और लगातार आंखों में थकान जैसी समस्याएं पाई गईं।
उन्होंने बताया कि कई वाहन चालक आंखों की समस्या की जानकारी होने के बावजूद बस, ऑटो, टैक्सी और अन्य वाहन चला रहे हैं, जो यात्रियों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
आंखों की कमजोरी से बढ़ रहा हादसों का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन चलाते समय ट्रैफिक सिग्नल, रोड साइन, पैदल यात्री और सामने से आने वाले वाहनों को समय पर देख पाना बेहद जरूरी होता है। आंखों की कमजोरी, चश्मा न लगाना या नियमित जांच न कराना कई बार बड़े सड़क हादसों का कारण बन जाता है।
आरटीओ की अपील – समय-समय पर कराएं आंखों की जांच
प्रादेशिक परिवहन अधिकारी मनीष शर्मा ने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि सुरक्षित ड्राइविंग के लिए अच्छी दृष्टि अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सभी वाहन चालकों को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
जांच के बाद दी गई इलाज की सलाह
नेत्र परीक्षण के बाद जिन लोगों में समस्या पाई गई, उन्हें उनकी आंखों की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई और जरूरत के अनुसार चश्मा, दवा या विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराने की सलाह दी गई।
सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत होंगे और कार्यक्रम
अधिकारियों ने बताया कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत आगे भी कोटा जिले में इस तरह के जांच शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और अभियान चलाए जाएंगे, ताकि सड़क हादसों को कम किया जा सके और लोगों को सुरक्षित यातायात के प्रति जागरूक किया जा सके।








