कोटा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर खुशियों का माहौल छाया हुआ था, लेकिन चाइनीज मांझे की क्रूरता ने एक मासूम बच्चे की जिंदगी छीन ली। नयापुरा क्षेत्र में मंगलवार को बाइक पर परिवार के साथ जा रहे पांच वर्षीय बालक धीर कुन्हाड़ी निवासी के गले में किसी उड़ती पतंग का चाइनीज मांझा लग गया। इस हादसे में बच्चे के गले पर गहरी चोट आई, जिससे उसकी सांस की नली तक क्षतिग्रस्त हो गई। तत्काल एमबीएस अस्पताल पहुंचाए गए धीर का ऑपरेशन किया गया, लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। यह घटना कोटा में चाइनीज मांझे के खतरनाक प्रभाव को एक बार फिर उजागर करती है।
घटना के अनुसार, मंगलवार को मकर संक्रांति के दिन धीर अपने पिता हेमंत सुवालका और मां के साथ बाइक पर नयापुरा की ओर जा रहा था। चंबल ब्रिज के पास अचानक मांझा उसके गले में लिपट गया। तेज धार वाले इस सिंथेटिक धागे ने गले में गहरा कट लगा दिया, खून बहने लगा और बच्चे की हालत गंभीर हो गई। परिजनों ने तुरंत उसे एमबीएस अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकीय टीम ने सांस की नली का आपातकालीन ऑपरेशन किया। करीब दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद बच्चे को ऑब्जर्वेशन में रखा गया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई। आज सुबह मासूम धीर ने अंतिम सांस ली।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही हुई। उन्होंने दावा किया कि रात्रि में सीनियर डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे, जिससे बच्चे की निगरानी ठीक से नहीं हो सकी। मृतक बालक के पिता ने एमबीएस अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का कहना है कि त्योहार की खुशियां अब हमेशा के लिए उदास हो गई हैं। धीर जैसे मासूम की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। समाज में एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि कब तक चाइनीज मांझा निर्दोष जिंदगियां छीनेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक सूती मांझे का इस्तेमाल सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन चाइनीज मांझे पर सख्ती से रोक लगानी होगी।
यह घटना चाइनीज मांझे के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है। मकर सक्रांति के दौरान पतंगबाजी के उत्साह में लोग प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो न केवल पक्षियों के लिए घातक है, बल्कि सड़क पर यात्रा करने वालों, खासकर बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन की ओर से बार-बार प्रतिबंध लगाने और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद बाजारों में यह खतरनाक धागा खुलेआम बिक रहा है। यह हादसा न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। मकर संक्रांति जैसे पर्व खुशियां बांटने के लिए हैं, मौत नहीं। प्रशासन, पुलिस और नागरिकों को मिलकर चाइनीज मांझे पर अंकुश लगाना होगा, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसे न हों।








