Breaking

पाकिस्तान को ट्रंप का बड़ा झटका! अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर और शहबाज को रखा बाहर

वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बातचीत की कोशिश शुरू होने के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत की पहल उसके कहने पर हो रही है और इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की अहम भूमिका है. खास बात यह रही कि ट्रंप ने इस बार पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। 

ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, UAE और कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके मुताबिक, अब बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना अहम है. हालांकि, ईरान ने ट्रंप के सीधे बातचीत शुरू होने के दावे को खारिज किया है और कहा है कि फिलहाल उसकी बातचीत ओमान के साथ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर हो रही है। 

तो क्या पाकिस्तान मध्यस्थता से बाहर हो गया?
जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पाकिस्तान और कतर को औपचारिक तौर पर मध्यस्थ पक्ष बताया गया था. कतर के विदेश मंत्रालय ने भी जून में कहा था कि वह पाकिस्तान की अगुवाई वाली मध्यस्थता का समर्थन कर रहा है. 22 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल बैठक में अमेरिका और ईरान के साथ कतर और पाकिस्तान दोनों मध्यस्थ पक्ष के तौर पर शामिल हुए थे. उस समय परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों और आगे की बातचीत के लिए मंच बनाने पर चर्चा हुई थी। 

राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से ऐसा संकेत जरूर मिलता है कि मौजूदा चरण में खाड़ी देश ज्यादा प्रमुख भूमिका में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान पूरी तरह मध्यस्थता से बाहर हो गया है। 

पाकिस्तान को लेकर क्यों उठे सवाल?
पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह एक तरफ ईरान के साथ अपने भौगोलिक और धार्मिक-सामाजिक संबंधों का फायदा उठा सकता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और सऊदी अरब के साथ उसके रणनीतिक रिश्ते भी हैं. यही संतुलन उसकी मध्यस्थता को मुश्किल बनाता है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जून में खुद ट्रंप ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता को बातचीत आगे बढ़ाने में मददगार बताया था। 

खाड़ी देशों की भूमिका क्यों बढ़ी?
सऊदी अरब, UAE और कतर सीधे इस संकट से प्रभावित हैं. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का सीधा असर खाड़ी की अर्थव्यवस्था, तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है. इसी वजह से इन देशों की कोशिश है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बड़ी जंग न छिड़े. मई में भी इन तीनों देशों ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत को मौका देने की अपील की थी। 

ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान पाकिस्तान के लिए जरूर एक कूटनीतिक झटका दिख सकता है, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है. दोहा और मस्कट इस समय बातचीत के अहम केंद्र बनते दिख रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की भूमिका पर्दे के पीछे या अगले दौर की बातचीत में फिर सामने आ सकती है। 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार इस्लामाबाद सिर्फ एक सहायक मध्यस्थ रहेगा या फिर अमेरिका-ईरान के बीच अगले बड़े समझौते में दोबारा केंद्रीय भूमिका हासिल कर पाएगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो यह पाकिस्तान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा, जिसके नेता अभी हाल के दिनों तक ही ट्रंप की आंखों का तारा बने हुए थे। 

Habulal Sharma

Habulal Sharma

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

Would You Like To Read..

  • All Posts
  • एजुकेशन एंड जॉब
  • खेल
  • टॉप न्यूज़
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • बिजनेस
  • बॉक्स ऑफिस
  • राजस्थान
  • लोकल मार्केट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • एजुकेशन एंड जॉब
  • खेल
  • टॉप न्यूज़
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • बिजनेस
  • बॉक्स ऑफिस
  • राजस्थान
  • लोकल मार्केट

© 2025 | All Rights Reserved | Sachreport.com | Developed By Best Newsportal Development Company

Contacts

Office address – Sach Report, Building Number-1k10, Talwandi Kota (Rajasthan)
Mobile – 6378219602
Mail Us At: sachreport24@gmail.com

error: Content is protected !!