Breaking

तरुण तेजपाल रेप केस में बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने बरी करने का आदेश पलटा; दोषी करार

मुंबई

तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के बहुचर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार (6 अगस्त) को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मापुसा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। अदालत ने अब तेजपाल को इस मामले में दोषी करार दिया है।

सजा का ऐलान आज ही
जब अदालत ने यह फैसला सुनाया, तब तरुण तेजपाल कोर्ट रूम में ही मौजूद थे। दोषी करार दिए जाने के बाद उन्होंने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की है। हाई कोर्ट आज दोपहर 2:30 बजे तेजपाल की सजा की अवधि का ऐलान करेगा। गौरतलब है कि गोवा सरकार ने 2021 में सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर यह फैसला आया है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि निचली अदालत का फैसला “खराब निष्कर्षों का एक क्लासिक मामला” था। राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जिस तरह से इस मामले को डील किया, वह हैरान करने वाला था। ऐसा लग रहा था मानो कोर्ट ने आरोपी के बजाय पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया हो। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने यह तय करने की कोशिश की कि यौन उत्पीड़न की शिकार किसी महिला को घटना के बाद कैसा व्यवहार करना चाहिए।

तेजपाल की तरफ से यह दलील दी गई थी कि पीड़िता का बयान भरोसेमंद नहीं था और सीसीटीवी फुटेज भी आरोपों की पुष्टि नहीं करता। हालांकि, हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और तेजपाल द्वारा पीड़िता को भेजे गए ‘माफीनामे वाले ईमेल’ को अहम आधार मानते हुए उन्हें दोषी पाया।

यह मामला एक पूर्व कनिष्ठ सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उसने दावा किया था कि नवंबर 2013 में गोवा में ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था. निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

तरुण तेजपाल ने कोर्ट में क्या कहा?
अदालत के फैसले पर तरुण तेजपाल ने कहा, “मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना ​​है कि मैं पीड़ित हूं. मेरी पत्नी है और इसके अलावा मेरे पास कहने के लिए कुछ खास नहीं है. मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं. कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें. बाकी सभी तथ्य रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। 

सॉलिसिटर जनरल और बचाव पक्ष की दलीलें
तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा. मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन कर गंभीर गलती की. सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया को लेकर कोई सार्वभौमिक मानक नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी, जबकि यह जांचना चाहिए था कि उसके मुख्य आरोपों में निरंतरता बनी रही या नहीं। 

बचाव पक्ष की दलीलें
वहीं बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि अभियोजन ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया. उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घटना से पहले और बाद में उसका व्यवहार, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और दस्तावेजी रिकॉर्ड अभियोजन के मामले के विपरीत हैं. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि चलती लिफ्ट में शिकायतकर्ता को कैद रखे जाने का उसका बयान विशेषज्ञ साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाता। 

क्या था पूरा मामला?
नवंबर 2013 में गोवा के एक फाइव-स्टार होटल के एलिवेटर (लिफ्ट) में तहलका मैगजीन के एक इवेंट (THiNK fest) के दौरान तरुण तेजपाल पर उनकी ही एक जूनियर महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले के तूल पकड़ने पर तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। मई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। 21 मई 2021 को गोवा की एक सेशंस कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें मुजरिम ठहराया है।

तेजपाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, एक साल से भी कम समय में जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। सितंबर 2017 में सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए। दोनों पक्षों की निजता और सम्मान की रक्षा के लिए इस पूरे मामले का ट्रायल ‘इन-कैमरा’ किया गया। अंततः अभियोजन पक्ष के 71 गवाहों और सीसीटीवी फुटेज व ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के बाद सेशन कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

Habulal Sharma

Habulal Sharma

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

Would You Like To Read..

  • All Posts
  • एजुकेशन एंड जॉब
  • खेल
  • टॉप न्यूज़
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • बिजनेस
  • बॉक्स ऑफिस
  • राजस्थान
  • लोकल मार्केट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • एजुकेशन एंड जॉब
  • खेल
  • टॉप न्यूज़
  • दुनिया
  • देश
  • धर्म
  • बिजनेस
  • बॉक्स ऑफिस
  • राजस्थान
  • लोकल मार्केट

© 2025 | All Rights Reserved | Sachreport.com | Developed By Best Newsportal Development Company

Contacts

Office address – Sach Report, Building Number-1k10, Talwandi Kota (Rajasthan)
Mobile – 6378219602
Mail Us At: sachreport24@gmail.com

error: Content is protected !!